क्या आप अपने लोको पायलटो के बारे में जानते है ? (06) सहायक लोको पायलट

आदरणीय पाठक ...इस कड़ी में आप रेलवे के लोको चालको के बारे में जानकारी हासिल करेंगे ! व्यस्तता की वजह से इसे संक्षेप में ही प्रस्तुत किया जायेगा ! जिसे छोटे - छोटे किस्तों में प्रस्तुत करूँगा ! पूरी  सिलसिलेवार जानकारी हेतु क्रमानुसार पढ़ें ! जैसे -- शुरुवात ..(01)  से करते हुए आगे बढ़ें !

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                                                   ०६ ) सहायक लोको पायलट 

रेलवे में चालक दल का पहला कदम , तो यही है । नवजवानों में लोको पायलट बनने की उत्सुकता बहुत होती है । अतः कईयों की फ़ोन या मैसेज आते रहते है । इन नौजवानों के प्रश्न एक ही होते है जैसे - लोको पायलट बनने के लिए क्या करूँ ? इसके लिए कौन सी शैक्षणिक योग्यता जरूरी है ? भर्ती किस तरह से होती है ? वगैरह - वगैरह ।
इसी से प्रभावित होकर मैंने इस श्रंखला की तयारी की है , जो संक्षेप में उलझी हुयी समस्याओ की निराकरण करने की एक छोटी प्रयास है । सबसे पहले इसके लिए 

आवश्यक उम्र --
१) UR -१८-३० वर्ष।
२)OBC -१८-३३ वर्ष ।
३)SC/ST-१८-३५ वर्ष ।
मूलतः जरूरी है या नोटिफिकेशन के अनुरूप आवश्यक उम्र जरूरी होती है ।

बी) शैक्षणिक योग्यता - 

मैट्रिक या इसके समकक्ष , आई टी आई के साथ / एक्ट अपरेंतिसशिप निम्न  विषयों में चाहिए - १) फिटर  २) इलेक्ट्रीशियन ३) इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक ४) मिल राइट / मेंटेनेंस मैकेनिक ५ ) मैकेनिक रेडियो / टीवी ६)इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक   ७)मैकेनिक मोटर व्हीकल ८)वायरमैन ९) ट्रेक्टर मैकेनिक १०)अर्मेतुरे और कएल विंडर ११) मैकेनिक डीजल १२)हीट इंजन १३)टर्नर १४)मैकेनिस्ट १५)रेफ्रिजरेशन और एसी मैकेनिक ।

डिप्लोमा होल्डर्स - जिन्होंने ने मैकेनिकल / इलेक्ट्रिकल /इलेक्ट्रॉनिक्स / ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग की है  भी आवेदन  कर सकते है ।

आवेदन कैसे करें - समय - समय पर रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड इसके लिए notification  जारी करता है । जो एम्प्लॉयमेंट मेंट न्यूज़ / रोजगार समाचार में प्रकाशित होते है । अतः इच्छुक नौजवान रोजगार समाचार पर   काक दृष्टि लगाये रखे ।

वेतन -छठवे वेतन आयोग के अनुसार - पीबी -१ में ग्रेड पे - १९०० रुपये और पे बैंड --५२०० -२०२०० रुपये ।
आवश्यक नियम की पूर्ति के बाद - लिखित परीक्षा के लिए कॉल लैटर जाते है । लिखित परीक्षा में पास होने के बाद सयिकोतेस्त होती है । इस टेस्ट  पास करने के बाद सिर्तिफिकैते भेरिफिकेशन और मेडिकल होती है , जिसमे आँख की रोशनी ये - १ होनी चाहिए ।   कुछ होने के बाद अपॉइंटमेंट लैटर जाते है ।
                                                                         या
समय के अनुसार जारी अनुदेशों का पालन होता है । जिसके लिए मै जिम्मेदार नहीं हूँगा ।

आज बस इतना ही। अगले कड़ी में सहायक लोको पायलट के कार्यो के बारे में चर्चा करेंगे । 
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                                                                      (०५)
लोको पायलट |

जी  हाँ , लोको पायलट  वहीँ है जिन्हें आप पहले रेलवे के ड्राईवर कहा करते थे या अभी  भी कह देते है | आल इण्डिया लोको पायलट एसोसिएशन ने १९९५ के बाद रेलवे के इस पद के नाम को बदलने के लिए सुझाव दिया था और कहा था की ड्राईवर के पद को लोको ऑपरेटिंग इंजिनियर कर दिया जाये |पर हुआ कुछ और ही | उस समय श्री  नितीश कुमार जी रेल मंत्री थे | इस सुझाव के मुख्य कारन यह था की रेलवे ने ड्राईवर का क्वालिफिकेशन डिप्लोमा और इंजीनियरिंग रखा था | ऐसा तो नहीं हुआ , पर लोको पायलट कर दिया गया | रेलवे में इसकी न्यूनतम क्वालिफिकेशन भी आई टी आई /डिपलोमा कर दिया गया | आज कल लोको पायलट बनने के लिए कोई भी यांत्रिक क्वालिफिकेशन पर्याप्त है |

लोको पायलट की शुरुआत सबसे पहले ( भाप के इंजन के ज़माने में ) स्टीम शेड से शुरू हुयी थी | जो लोग स्टीम शेड में काम करते थे वह भी इंजन  क्लीनर के रूप में , उन्हें फायर मेनके रूप में भरती किया जाता था | फायर मेन ग्रेड सी > ग्रेड बी >ग्रेड ये और उसके बाद डीजल इंजन में सहायक के रूप में पदोन्नति होती थी | चुकी स्टीम इंजन का कार्य परिश्रम भरा था , इसी लिए उस समय कोई योग्यता नहीं थी | अनपढ़ भी ड्राईवर बन जाते थे | , आज - कल शिक्षा का बोल बाला है , अतः समय बदलते ही आई टी आई / डिपलोमा भारी पड़ने लगा है | आज कल लोको पायलट की सीढी  इस प्रकार है | १) सहायक लोको पायलट  २) सीनियर सहायक लोको पायलट  ३) लोको पायलट शंटिंग  ४) सीनियर लोको पायलट शंटिंग ५) लोको पायलट गुड्स ६)लोको पायलट पैसेंजर  और लोको पायलट मेल / एक्सप्रेस

अगले अंक में १) सहायक लोको पायलट के बारे में जानने की कोशिश करेंगे |

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                                                                       (04)
 रेलवे के विभाग और उससे सम्बंधित कर्मचारी !  
रेल पर चलने वाली इस रेल की कहानी गजब है । आप जिस रेल के ऊपर सवार  होते है . वह -रात   दिन की गति को पूरी करती हुयी , आप को आपके गंतव्य स्थान पर पहुंचा देती है ! जरा ध्यान से सोंचिये की आप को कितने लोगो की  ?  इस ट्रेन को चलाने  के लिए रेलवे लाईन , डिब्बे (  जिसमे आप ने सवारी की है ), इसे खींचने के लिए - लोको ,ट्रेन को चलने के लिए - सिगनल , व्यवस्था के अनुसार सिगनल संचालन हेतु - स्टेशन , स्टेशन का   संचालक - स्टेशन मैनेजर , इसके बाद सारी  संचालन व्यवस्था - एक कंट्रोलर के हाथ में ,पूरी कंट्रोल व्यवस्था -कई अफसरों के जिम्मे ।

इस तरह से देंखे तो हम पाते है की हजारो हाथों की कड़ी मेहनत के बाद आपकी यात्रा मंगलमय हुयी । आप की शुभ यात्रा में हजारो हाथों की दुआए छुपी हुयी है ! जो दिन- रात अपने अथक परिश्रम से व्यवस्था को बनाये रखते है ।  रेल से सम्बंधित विभाग को इंजीनियरिग विभाग से जाना जाता है । इसके अंतर्गत गैंग मेन , गेट  मेन , पि डब्लू आई ( आज - कल सेक्शन इंजिनियर ) , ADEN , Sr DEN वगैरह आते है । कोच के अंतर्गत - खलासी , सेक्शन इंजिनियर , इंस्पेक्टर , AME (C &W ), Sr DME (C &W )आते है । सिगनल में एमएसएम् , ESM , इंस्पेक्टर , ASTE ,DSTE ,SrDSTE आते है । सञ्चालन के क्षेत्र में पाईंट मेन , जमादार , स्टेशन मैनेजर , ट्राफिक इंस्पेक्टर ,AOM , DOM , SrDOM  आते है ।लोको को तैयार रखने के लिए - तरह तरह के लोको शेड होते है । इलेक्ट्रिक , डीजल  और स्टीम शेड (अब नहीं है )। इन्हें संचालित करने के लिए खलासी , सेक्शन इंजीनियर्स ( इलेक्ट्रिक और डीजल ),AME , DME , SrDME  वगैरह होते है ।

अब आये देखते है जो लोको को चलाते है । इन्हें रेलवे में ड्राईवर कहा जाता था , अब ये लोको पायलट / लोको चालक के नाम से जाने जाते है । इनके ऊपर के पोस्ट - मुख्य कर्मचारी नियंत्रक , पावर कंट्रोलर ,ADME (पॉवर ),DME (पॉवर ) Sr DME (पॉवर ) है ।

इसके अलावे कमर्शियल विभाग है , जो टिकट की बिक्री , टिकट की चेकिंग ( टीटी यी ) , आरक्षण वगैरह के कार्यो को देखते है । सञ्चालन के अंतर्गत माल गाडियों की जिम्मेदारी होती है । कर्मचारियों के कल्याणकारी का कार्य प्रशासनिक विभाग के अंतर्गत होता है , जो सैलरी के बिल को तैयार करती है। तरह - तरह के सुबिधाओ को व्यवस्थित कराती है । अकाउंट विभाग खर्चो का लेखा जोखा  है । क्लर्क , सेक्शन OFFICER ,सभी इसके अंतर्गत आ जाते है । और भी बहुत से विभाग है । एक तरह से देखा जाय तो रेलवे एक समंदर है , जहाँ नौकरी - पेशा के बहुत से साधन उपलब्ध है ।

आज बस इतना ही , अगले अंक में विषय पर लौटते हुए  - लोको पायलट के बारे में जानेंगे ।


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                                                                      ( ०३) 
रेलवे की उपयोगिताएं = यह रेल भी गजब की चीज है ! कोयले से लेकर विद्युत् तक ..कदम से कदम मिलाकर आगे बढाती रही है ! ! झक - झक या चहक - चहक  कर बड़ी और सुरीली आवाजो के साथ आपको मंजिल तक ले जाती है !भाप के इंजनो के ज़माने में लोग इसे देखने के लिए गाँव से दौड़ कर आते थे । आज रेलवे विश्व और हमारे देश  का एक सस्ता और किफायती यातायात का माध्यम बन गया है । आज बस का किराया बहुत ज्यादा है ! ट्रेन सभी सुब्धाओ के साथ आराम दायक और जनमानस का सबसे प्रिय यातायात का साधन है ! हर चौराहे पर लोगो का एक समूह मिल जायेगा , जो  इसे अंजाम देने वाले , इसे चलाने वाले और उनके  रहन सहन के बारे में जानने की उतसुकता हमेशा रखते है  ! आज जिसे पैसा नहीं है वह भी बिना टिकट इस ट्रेन में यात्रा कर लेता है !जनमानस की सबसे सस्ती सुविधा !

बचपन में ट्रेन को देखने के बाद , मन में सदैव यही इच्छा रही की ...काश मै  भी  लोको पायलट होता ! यही वजह है की इस कार्य क्षेत्र में भाग्य को आजमाया !  जी हाँ इस लोको को चलाने वालो को ड्राईवर कहते थे ! स्टीम ड्राईवर , डीजल ड्राईवर , इलेक्ट्रिक ड्राईवर वगैरह - वगैरह ! कितने मंत्री आयें और गएँ ! श्री नितीश कुमार जी के समय में इन ड्राईवर ओ को  लोको पायलट / लोको चालक के रूप में जाना जाने लगा ! आज इसे चलाने वालो को लोको चालक / लोको पायलट कहते है ! क्या आप भी इस क्षेत्र में आना चाहते है ? तो फिर देर क्यूँ ? लगे रहे और इस सिलसिलेवार पोस्ट को पढ़ते रहे ! आप को लोको पायलटो के  में बहुत सी जानकारी मिलेगी !


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                                                                           (०२)
संगठनात्मक ढांचा = इसे सुब्यावस्थित सञ्चालन के लिए कई जोनो में विभाजित किया गया है ! इस तरह से कुल १७ ज़ोन है ! जिनके नाम--
 १) नार्थ सेंट्रल रेलवे ( उत्तर मध्य रेलवे )---मुख्यालय =इलाहबाद
२)सेंट्रल रेलवे ( मध्य रेलवे )-------------मुख्यालय =मुम्बई
३)नोर्थ वेस्टर्न रेलवे ( उत्तर पच्छिम रेलवे )---मुख्यालय = जयपुर
४)वेस्ट रेलवे ( पच्छिम रेलवे )-----मुख्यालय = मुम्बई
५) वेस्ट सेंट्रल रेलवे ( पच्छिम मध्य रेलवे )--मुख्यालय = जबल पुर
६) साउथ वेस्टर्न रेलवे  (दक्षिण पच्छिम रेलवे )--मुख्यालय = हुबली
७)साउथ सेंट्रल रेलवे ( दक्षिण मध्य रेलवे )---मुख्यालय = सिकंदराबाद
८)सौदर्न रेलवे ( दक्षिण रेलवे )--------मुख्यालय =चेनई
९)साउथ ईस्ट  सेंट्रल रेलवे ( दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे )- मुख्यालय = बिलासपुर
१०) ईस्ट सेंट्रल  रेलवे (  पूर्व मध्य  रेलवे )--मुख्यालय = हाजीपुर
११) ईस्ट कास्ट रेलवे (पूर्व तटीय रेलवे )--मुख्यालय = भुबनेश्वर
१२)ईस्टर्न रेलवे ( पूर्व रेलवे )---मुख्यालय = कोल्कता
१३) साउथ ईस्ट  रेलवे (दक्षिण पूर्व  रेलवे )-मुख्यालय = कोल्कता
१४)नोर्थ फ्रंटियर रेलवे ----मुख्यालय = बोंगईगांव
१५)नोर्थ ईस्टर्न रेलवे ( उत्तर पूर्व रेलवे )-- मुख्यालय =गोरखपुर
१६)नोर्दर्न रेलवे (उत्तर रेलवे )-- मुख्यालय = नयी दिल्ली और
१७ मेट्रो रेलवे कोलकत्ता -- मुख्यालय = कोल्कता !
इन सभी जोनो के मुखिया को महाप्रबंधक  कहते है ! महा प्रबंधक को मदद हेतु कई निम्न अधिकारी होते है ! इनकी भरमार होती है ! गाढ़ी कमाई / बड़ा वेतन और पद का दुरूपयोग भी देखने को मिलाता है ! संरक्षा , सुरक्षा ,यातायात , यांत्रिकी , विद्युतीय ,कल्याणकारी  सिगनलिंग  इंजीनियरिंग ..तरह - तरह के पोस्ट है !इन सभी ज़ोन के अन्दर दो से लेकर सात तक मंडल होते है ! सभी मंडलों को ज़ोन के आदेश को कार्यान्वित करने पड़ते है ! मंडल के प्रमुख को मंडल रेल मैनेजर के नाम से जानते है ! मंडल में भी ज़ोन की तरह कई छोटे - छोटे मंडल स्तर के अधिकारी होते है , जो रेलवे के कार्य को निचले स्तर पर कार्यान्वित करते है ! ये अधिकारी रेलवे के चतुर्थ और तीसरी श्रेणी के कर्मचारियों के समीप होते है !जो सभी आदेशो और अनुदेशों को सही से लागू कराने के प्रयत्न जारी रखते है ! कर्मचारियों को इनके कोप भाजन के शिकार होने पड़ते है !चार्ज सिट देना या सजाये पास करना , कोई इनसे सीखे !



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                                                                                (०१)
रेलवे  =  यह एक सस्ता और सुरक्षित यात्रा का एक साधन है ! जी विश्व में एक नमूना है !ऐसा सुलभ और सस्ता उपकरण दुनिया में कहीं भी नहीं मिलेगा !विश्व में इसकी दूसरी स्थान है !पूरब से पच्छिम और उत्तर से दक्षिण तक एक सूत्र में बंधा हुआ है ! जिसे भारतीय लोक तंत्र में एक मंत्री प्राप्त है !जिसे हम रेलवे मंत्री कहते है ! इन्हें मदद हेतु दो / तीन राज्य मंत्री भी होते है !जो सत्तासीन सरकार के ऊपर निर्भर है ! एक निदेशक मंडल इन मंत्रियो को  सुझाव और प्रशासन हेतु मदद देते है , जिन्हें रेलवे बोर्ड के नाम से जानते है !इस बोर्ड के आदेशो को सभी ज़ोन अंगीकार करते है ! भारतीय लोकतंत्र में यह एक विराट नौकरी मुहैया करने  का साधन है !  जिससे कई लाख कर्मचारी और उनके आश्रित लाभान्वित होते है ! इस संगठन से जुड़े लोग अपने को गौरवान्वित महसूस करते है ! रेलवे हमारे राष्ट्र की शान है ! एकता की अनूठा उदहारण है ! आयें हम इसे आगे बढ़ने और सुरक्षित रखने की शपथ लें !

14 comments:

  1. आशुतोष रंजनम्03 May, 2016

    क्या लोको पायलट बनने के लिए अंग्रेजी भाषा का ज्ञान आवश्यक है?
    आपने एक अच्छा प्रयास किया है।

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  2. मुझे भी लोको पायलट बने की ईच्छा है, इसके लिए मुझे क्या करना होगा? में ITI में electrician student हूँ

    Name-kkrishnarao
    RAIPUR c.g.

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  3. आशुतोष जी कंपलसरी नहीं पर ज्ञान हो तो सोने पे सुहागा होगा ।
    कृष्णा राव इस पढ़ाई को पूरी कीजिये । इलिजिबल कोर्स है ।

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  4. Thanxxx for motivation....sirrrrr

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  5. sir hum alp ka liya ek saath kitne zone mai apply kar sakta hai

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  6. Sir maine "Coe electronics"se iti kiya hai kya mai alp ke liye apply kar sakta hu

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  7. This comment has been removed by the author.

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  8. Dear sir
    Reb 129/2015 report ka anusar diploma electronics with any substream like (communication,telecommunication , hardware) locopilot ka liya eligible Hai Kyo ki 2014 wale Mai Mera Kuch dost log ko verification time Chaat Diya gaya Tha Kya aab eligible Hai locopilot ka liya Jara batayia

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  9. sir diesel.iti ka course krne se kya diesel engine hi chalane ke liye milega kya

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  10. Anonymous15 June, 2017

    सर मैं लोको पायलट बनना चाहता हूं
    मेरा 10वीं math से 85•5%है
    और अबकी बार बाहरवीं 66% math से पास किया है
    इसके लिये मुझे अब आगे क्या करना होगा।
    और iti में इसके लिये सबसे अच्छा ट्रेड कौन है।plzzz sir help me●

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  11. Sir.. Mera naam Karan mera 12 complete hone wala hai in commerce uske baad mai kon sa ITI trade join karu locopilot banne k liye

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  12. Hi.
    My name is Gagan from chandigarh.
    Maine 10th ke bad mechanical se diploma kiya h kya m loco pilot bn skta hu . 59 % marks the mere diploma me .

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